रवि शर्मा, पुणे. पिछले हफ्ते लास वेगस में हुए सीईएस 2020 में जिस कदर 8K टीवी को तवज्जो मिली है, उससे किसी को भी ऐसा लग सकता है कि ये साल 4K टीवी के लिए नहीं है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है, जानिए...
8K के मायने
फुल एचडी का चार गुना रेजॉल्यूशन मिलता है एक 4K अल्ट्रा एचडी में। 4K अल्ट्रा एचडी की तुलना में आप 8K अल्ट्रा एचडी में दो गुना बेहतर रेसॉल्यूशन पाते हैं। लेकिन फर्क केवल इतना है कि 4K और 8K टीवी को साथ रखा जाए तो ही आप इसे आंक सकते हैं, वो भी रंगों में दिखते फर्क के कारण। अगर इन दोनों टीवी को अलग रखा जाए तो फर्क कर पाना लगभग असंभव है।
8K कंटेक्ट की मौजूदगी
दुनिया में बेहद कम कैमरे हैं जो 8K में फिल्मा सकते हैं। इनका एक दिन का किराया लाखों डॉलर्स होता है। टीवी और फिल्मी दुनिया को 4K कंटेंट के लिए तैयार होने में ही कई साल लग गए, अभी भी इसे स्टैंडर्ड फॉर्मेट नहीं कहा जा सकता है। नेटफ्लिक्स ने साल-डेढ़ साल पहले अल्ट्रा एचडी पर इन्वेस्ट करना शुरू किया है। अभी तो 8K टीवी के प्रमोशन के लिए फिल्माई गई प्राकृतिक सौंदर्य की कुछ क्लिप्स की मौजूदगी ही इस फॉर्मेट में दिखाई दे रही हैं।
इन वजहों से भी 4K टीवी खरीदना ही सही
- 8K बेहद महंगे हैं, भारत में एक अच्छा 8K टीवी 13 लाख रुपए के आस-पास मिलता है जबकि 40 इंच का 4K टीवी 40 हजार रुपए में ही मिल सकता है।
- 8K टीवी की उपयोगिता तब है जब इसका कंटेंट उपलब्ध है। कुछ साल में कंटेंट आ भी गया तो इसकी स्ट्रीमिंग के लिए बेहद ताकतवर ब्रॉडबैंड कनेक्शन की जरूरत होगी, 4K को ही कम से कम 35एमबीपीएस स्पीड के कनेक्शन की जरूरत होती है।
- इंसानी आंखों 8K और 4K के फर्क को समझना काफी मुश्किल है, इसलिए क्वालिटी का अंतर ना के बराबर है, ऐसे में 8K खरीदना एक बड़ी रकम को बेवजह उलझाना है।
यह भी जानिए
- एक भी फिल्म या टीवी सीरीज अभी तक 8K में नहीं है और शायद ही अगले साल भी आए।
- 2019 में करीब नौ लाख 8K टीवी दुनियाभर में बिके हैं, इनमें से आधे तो चीनियों ने खरीदे।
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